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Story of Adolf hitler part-1: (तानाशाह अदोल्फ हिटलर की कहानी पार्ट :1)

 दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह हिटलर:


 इतिहास के पन्नों में एक ऐसा नाम जिसे आज भी तानाशाही के लिए याद किया जाता है| एक ऐसा डिक्टेटर  जिस नाम से दुनिया खौफ खाती थी | जिसकी एक एक्शन  से दुनिया में दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया | और राष्ट्रवादी स्कूल का एक ऐसा विद्यार्थी जिसने न केवल जर्मनी बल्कि दुनिया के कहीं मुल्क के लोगों में अपने मुल्क के लिए जोश और गर्व की भावना जगा दी | उसे बड़े तानाशाह नेता का नाम था हिटलर|

हिटलर के बचपन के जीवन की कुछ बाते 

:

        

हिटलर का जन्म 1889 मे ओष्ट्रीया और जर्मनी के सरहद पर छोटे से नगर  ब्रोनो एम इन मे हुआ था | उसके पिता का नाम अलॉयस हिटलर था और उसकी माता का नाम क्लारा था |हिटलर एक मध्य वर्ग के परिवार से ही आता था| उसके पिताजी एक कस्टम अधिकारी थे | 1908 में उसकी माता क्लारा के मौत की बाद हिटलर अपने करियर के लिए विएना  चला गया | उसका ख्वाब एक आर्टिस्ट बनने का था | वियना में उसने पेंटिंग की लाइन में आगे बढ़ने का फैसला लिया | वह पैसा कमाने के लिए अपने हाथों से बनाई हुई पेंटिंग बेचता था |

 हिटलर ने बनाई हुई पेंटिंग:

(1)विंटर क्लॉक टावर, (2) वियना स्टेट ओपेरा हाउस,    (3)सक्लोस वेलवेदरे,   (4)कुदरती दृश्य 

 हिटलर की युद्ध की शुरुआत : 


1908-1913 तक हिटलर ऑस्ट्रिया की राजधानी विऐना में  रहा | इस 5 साल में हिटलर को यहूदी से इतनी नफरत हो गई कि वह आगे चल के दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह बन गया | इसी दौरान अपनी पेंटिंग की करकीदी को छोड़कर 1913 मे वियना से जर्मनी के म्युनिख शहर चला गया | 1914 का प्रथम विश्व युद्ध में हिटलर को जर्मनी के सैन्य बल में शामिल किया गया | फ्रांस में सोमे की लड़ाई में जर्मनी की सेना ने मित्र देश का डटकर सामना  किया था| सोने की लड़ाई इतिहास के सबसे भीषण जंगो में गिनी जाती है| इस लड़ाई में भले ही जर्मनी को हारका सामना करना पड़ा | लेकिन मित्र देशों को भी इस युद्ध बड़ा नुकसान हुआ था| 1916 मे सोमे नदी के पास लड़ी गई इस जंग में 10 लाख से भी ज्यादा सैनिक मारे गए थे |हिटलर बी इस जंग में मरते मरते बचा| इस जंग में हिटलर की जाबाजी के लिए उसे बहुत सारे मेडल मिले| जंग में जर्मनी हार गया चार हिटलर को मुंह की खानी पड़ी|

 नाजी पार्टी( नाजीवाद ):


 जर्मनी को फिर से उठने के लिए और मित्रों देश से बदला  लेने के लिए हिटलर ने लोगों को उकसाया|

 आर के बाद हिटलर 1918 मे म्यूनिख लोटा और लोगों को एलाइड कंट्री के खिलाफ एक करने के लिए जर्मन वर्कर्स पार्टी के एक  पार्टी में शामिल हो गया | जर्मन वर्कर्स पार्टी आम लोगों में जर्मनी के लिए राष्ट्रवाद जगाने का काम करती थी| पार्टी में काम करते-करते हिटलर कद धीरे-धीरे बढ़ने लगा | इसके बाद इस पार्टी में कुछ धीरे-धीरे बदलाव होने लगे| इस पार्टी का नाम बदलकर 1920 मे नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी रख दिया गया| स्वास्तिक को इस पार्टी का चिन्ह बना दिया गया| यह वही स्वास्तिक चिन्ह है जिसे हिंदू और जैन धर्म में जोड़ के देखा जाने लगा |

 वर्साय संधि ने दूसरा विश्व युद्ध की नींव कैसे रखी?

 नवंबर,1918 मे प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हो चुका था| इस युद्ध में जर्मनी को हर का सामना करना पड़ा था| इसीलिए जर्मनी के दुश्मन देश को मालूम था कि जर्मनी के लोग अब शांत नहीं बैठेंगे| सभी जर्मनी के दुश्मन देश ने एक साथ मिलकर जून 1919 मे फ्रांस की राजधानी पेरिस में पैलेस ऑफ़ वरसाई में शांति संधि का प्रस्ताव रखा| इस संधि में जर्मनी और उसके साथी मित्र और जर्मनी के दुश्मन मित्रों की बैठक हुई | इस संधि में सभी देशों ने दस्तक की और कहा की यह संधि जनवरी 1920 में लागू होगी |

 इस संधि में कहा गया कि कुछ शर्ते जर्मनी को माननीय होगी|

 1) अब जर्मनी को एक लाख से ज्यादा सैनिक नहीं रखेंगे|

2) मित्र देश को इस युद्ध में जितना भी नुकसान हुआ उसकी भरपाई जर्मनी करेगा|

3) इस युद्ध में जर्मनी ने फ्रांस के लोहे और कोयले का बहुत उपयोग किया इसलिए अगले 15 साल तक जर्मनी के सारे लोहे और कोयले के क्षेत्र पर फ्रांस का अधिकार होगा|

4) जर्मनी के अधिकार वाले दीपों को मित्र राष्ट्र को दे दिया गया |

इस संधि में कहा गया की प्रथम विश्व युद्ध के लिए केवल और केवल जर्मनी जिम्मेदार है| वर्साय संधिकी सारी बातों को जर्मनी के लोगों और हिटलर को अंदर ही अंदर खाए जा रही थी| इस बातों से जर्मनी के लोग और हिटलर बौखला गए| की वजह से हिटलर नाजी पार्टी की मदद से लोगों को उकसाने लगा और अगले कुछ सालों में  वर्साय संधि का बदला लेने के लिए लोगों में जर्मनी के लिए राष्ट्र भावना चरण सीमा पर पहुंच गई |

 हिटलर का झूठ: 

धीरे-धीरे हिटलर ने अपने भाषण के जरिए जर्मनी के लोगों को उकसाया और कहा कि जर्मनी की इस हालत की वजह यहूदी और साम्यवादी है | हिटलर ने जर्मनी के लोगों को कहां की धीरे-धीरे जर्मनी पर यहूदी कब्जा कर लेंगे|

 हिटलर ने की तख्तापलट की कोशिश :


 हिटलर ने पहले विश्व युद्ध के हीरो रहे जर्मनी के जनरल एरिव लूनडॉल्फ साथ मिलकर एक योजना बनाई कि अपने हथियार बंद सैनिकों के साथ  स्थानीय सरकार को गिरा दिया जाए  दोनों ने मिलकर तख्ता पलट करने की कोशिश की मगर वह नाकामयाब रहे| पूरी घटना को हम बीयर हॉल पुच के नाम से जानते हैं| इस कोशिश की वजह से हिटलर को 5 साल की सजा सुनाई | लेकिन उसने राजनीतिक रसूख इतना बड़ा दिया था की उसी वजह से जेल में नौ (9)महीने ही बीताये|

 हिटलर की किताब:


 इन नौ महीना में हिटलर ने एक किताब लिखी थी उसका नाम है मीन कैंफ इसका मतलब है मेरा संघर्ष | उसने इस किताब में नाजियों को सर्वोपरि और यह यहूदी को अपना दुश्मन मानने की बात की | हिटलर की लिखी गई किताब की वजह से सिर्फ जर्मनी में ही नहीं पूरी दुनिया में इसके चहिते की संख्या बढ़ने लगी| 1925 में नाजी सदस्य की संख्या बढ़कर 25000 हो गई | और 1929 आते आते इसकी संख्या 2 लाख से भी बढ़ चुकी थी| पहले विश्व युद्ध के कारण जर्मनी के लोगों आर्थिक संकट में जूझ रहे थे | इससे हिटलर की नाजी पार्टी को बहुत फायदा हुआ| आर्थिक संकट और बेरोजगारी के कारणों छे लोगों के मन में मौजूदा सरकार के खिलाफ गुस्सा था| इससे हिटलर की नाजी पार्टी को चुनाव में बहुत बड़ा फायदा हुआ | जिस नाजी पार्टी को 1928 में 80000 वोट मिले थे उस नाजी  पार्टी को 1932 में 1करोड़ 40 लाख वोट मिले | इसी चुनाव की वजह से हिटलर का तानाशाह  बनने का सफर शुरू हो गया|

 हिटलर का हत्याकांड :

 अपने करियर के 13 साल में हिटलर ने एक के बाद एक बड़े हत्याकांड किया |

1) 'the night of long knives '

2) 'the holocaust'

3) दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत भी हिटलर की वजह से ही हुई|

 हिटलर का आगे का इतिहास पार्ट 2 में हम देखेंगे.....


 



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