सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

HISTORY OF TATA GROUP : कंपनी का इतिहास|


 टाटा कंपनी की शुरुआत कैसे हुई?


टाटा कंपनी इतनी बड़ी है कि आज उसकी 100 से भी ज्यादा अलग-अलग ब्रांड है| जैसे कि टाटा मोटर, ताज होटल,टाटा नमक,टाटा टी,टाटा पावर प्लांट,तनिष्क ज्वैलरी| टाटा आज फेमस और सक्सेसफुल कंपनी है| इस कंपनी को 200 साल लगे  हैं यहां तक पहुंचाने के लिए|

 नसरवानजी टाटा के बारे मे|
1822 मा हमारी कहानी शुरू होती है पारसी धर्म में जन्म हुआ नसरवानजी टाटा उसे बचपन से ही कुछ अनोखा करने की लगन थी | और वह 20 साल की उम्र में ही मुंबई चले गए मुंबई जाकर उसने कॉटन का बिजनेस शुरू किया| और यह बिजनेस अच्छा खासा चलने लगा था और नसारवानजी टाटा चाहते थे कि वह अपने बेटे की पढ़ाई अच्छी तरह से कराये और उसके बेटे थे जमशेदजी टाटा | 

जमशेदजी टाटा | 

                                                              जमशेदजी नसरवानजी टाटा 

1859 में जमशेदजी टाटा 20 साल के थे तब उसको उसके पिताजी ने उसे हांगकांग बिजनेस के सेटअप के लिए भेजा गया था| वहां से वह बिजनेस कैसे चलाएं वह सब सीख कर आए थे | 

जमशेदजी नसरवानजी टाटा 65 साल की अपनी जिंदगी में उसे तीन बड़े काम किए |

1.) इंडिया में ढेर सारी कॉटन मिल खोलना खोली और उनके और उनके मालिक बने 

2) इसके साथ इंडिया की पहली स्टील कंपनी खोली जमशेदजी टाटा ने 

3) फाइव स्टार होटल खोला जिसका नाम है ताज होटल जो मुंबई में है|

 जमसेदजी टाटा के कई सपने थे हाइड्रोइलेक्ट्रॉनिक प्लांट, इंडिया में वर्ल्ड  क्लास एजुकेशन इंस्टिट्यूट,स्टील प्लांट खोलना चाहते थे और फाइव स्टार होटल | जमशेदजी टाटा  ने अपनी लाइफ में  फाइव स्टार होटल खोला था जिसका नाम है ताज होटल जो मुंबई में है| उसके देहांत से पहले बाकी के उनके प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका था |

दोराबजी जमशेदजी टाटा 

बाद में उनके बेटे दोराबजी टाटा जिन्होंने उसके बाकी तीन सपनों को पूरा करेंगे|


                                                               दोराबजी  जमशेदजी टाटा 

 दोराबजी टाटा  जमशेदजी टाटा के बाकी के तीन सपना उसके पूरे करेंगे| 1910 तक टाटा का स्टील प्लांट तैयार हो चुका था | और  स्टील प्रोडक्ट भी शुरू हो चुकी थी | इस टाइम पहला विश्व युद्ध शुरू हो गया था इसी दौरान ब्रिटिश अंपायर को जरूरत पड़ी स्टील की ब्रिटिश अंपायर टाटा कंपनी से स्टील खरीदते  हैं| इसी दौरान टाटा बन जाता है देश का सबसे बड़ा स्टील  सप्लायर| और इसी दौरान टाटा स्टील कंपनी ने बहुत ही तरक्की की | 1914 तक टाटा इतना बड़ा हो चुकी था कि उसने 14 कंपनियां खुल चुकी थी| 

 J. R. D. TATA

दोराबजी टाटा ने 1938 तक ए कंपनीया संभाली और उसके बाद उसके दूर के भाई J. R.D Tata  ने ऐ कंपनी संभाली |

J. R. D. Tata फ्रांस में बड़े हुए थे| वहां पर वह पायलट थे |  एयरलाइंस की स्थापना की और उसके बाद उसका नाम एर इंडिया किया गया | अब तक टाटा की 95 कंपनियां खुल चुकी थी|

रतन टाटा

 रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937  मुंबई में हुआ था ( उसका देहांत 9 अक्टूबर 2024 में हुआ)

 टाटा कंपनी का कारोबार संभालने आते हैं जमशेदजी टाटा के पोते रतन टाटा जो 1962 से फैमिली बिजनेस में काम करना शुरू कर दिया था लेकिन उसे 1971 रेडियो को की असाइनमेंट दी गई थी | 1971 से पहले लड़कों की ग्रोथ  मार्केटिंग 20% थी लेकिन 97 में इसकी मार्केटिंग 2% आ चुकी थी| बाद में उसे रतन टाटा ने संभाला| रतन टाटा ने सोचा कि अगर निर्गुण को हमें फिर से खड़ा करना है तो इसमें कुछ टेक्नोलॉजी का इन्वेस्ट करते हैं| जैसे कि सैटलाइट कम्युनिकेशन और 3 साल के अंदर अंदर ही नल कौन है 1975 में इसकी मार्केटिंग ग्रोथ हो गई 20% |

                                                                           रतन टाटा  

  1991 टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा को बनाया गया| और उसके बाद रतन टाटा ने एक कंपनी को ऐसे मुकाम तक ले गए जो आज टाटा के कई सारे ब्रांड हो चुके हैं | 2003 में कहा जाता है कि रतन टाटा ने एक फैमिली को स्कूटर पर ट्रैवल करते हुए चार लोग एक ही गाड़ी मैं जाति दिखे और उसके साथ बहुत बारिश भी हो रही थी यह सब चित्र उसने देखा | और उन्होंने उसके 5 साल बाद टाटा नैनो कार लोंश की इन नैनो कर लॉन्च करते हुए रतन टाटा ने ए कहानी सुनाई थी  टाटा नैनो  कार सिर्फ 1 लाख की थी |

 टाटा ने आज इतना बड़ा मुकाम हासिल कर दिया है कि उसकी कही सारी ब्रांड हो चुकी है|आज टाटा ने खाने से लेकर कहीं ऐसी ब्रांड खोली है की  टाटा मोटर्स,कपड़े की ब्रांड, ज्वेलरी ब्रांड, स्टील कंपनी खोली | और उसके साथ ही टाटा आज एक सक्सेसफुल कंपनी है|









टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

History of Changez khan: चंगेज खान आधी दुनिया पर राज करने वाला

  चंगेज खान     चंगेज खान का निजी जीवन  1162 में चंगेज खान का जन्म हुआ था| उसका नाम तैमूजीन गया था| जब उसका जन्म हुआ था तब उसके दाहिने हाथ में खून का धब्बा था | मंगल के लोग उसे दिव्य संकेत मानते थे एक ऐसा बच्चा जो दुनिया में राज करेगा या तो उसको तबाह कर देगा| तेमुजीन के पिता आचुतेय थे वह वह मंगॉल के कबिलेके बहादुर सरदार थे | तैमूजीन 9 साल का था तब उसके पिताजी ताताड़ जनजाति ने जहर देकर मार डाला | पिता की मृत्यु के बाद उनके ही काबिले के लोगों ने तैमूजेन और उसके परिवार को बेसहारा छोड़ दिया | बर्फीले जंगलों में उसके परिवार को अकेला छोड़ दिया| तैमूजीन ने शिकार करना सिखाए इस तरह बचपन में अकेले रहने से उसके मन में ए बैठ गया कि जिनेके लिए किसी पर भरोसा नहीं करना | उसे अपनी ताकत पर ही भरोसा करना पड़ेगा|  समय जाते-जाते उसने छोटे-छोटे साथियों को फिर से जुड़ा | उसने देखा कि पुराने मंगोलियों की जाती आपस में ही लड़कर बर्बाद हो रही थी | तैमूजीन जनता था कि उसे कुछ बड़ा करना होगा इस बिखरी ताकत को एक करना होगा | लेकिन उन्हें खून के रिश्ते को नहीं वफादारी और काबिलियत के लोगों ...

World lion day (10,August ): विश्व सिंह दिवस

  World lion day    World lion day मनाने की शुरुआत कब हुई थी? World lion day मनाने की शुरुआत 10 अगस्त 2013 से हुई है   शेर से जुड़ी हुई कुछ बातें | आमदौर पे शेर की आयुष 16 से 18 साल तक की होती है |नर रोजाना 8 किलो मांस खाता है और मादा 5 किलो खाती है | शेर जब एक बार व्यवस्थित भोजन करके 15 कलाक तक आराम करता है| शेर प्रति कलाक 50 किलोमीटर तक दोड़ता है जरूरत पड़ने पर प्रति कलाक 80 किलोमीटर भी दौड़ सकता है| परंतु ज्यादा वजन के कारण प्रतिकलक 80 किलोमीटर कभी-कभी दौड़ लगाते हैं| शेर हिंसा प्राणियों में सबसे आलसु प्राणी है और सबसे ज्यादा आराम करता है| शेर हमेशा रात्रि के समय पर ही शिकार करता है |  दुनिया में आज शेर की दो ही जाती जिंदा है | (1) एशियाटिक लायन    पूरी दुनिया में एशियाटिक लायन सिर्फ भारत के गुजरात में साषण गिर में स्थित है |  एशियाटिक लायन नर की लंबाई 6.5 फिट से 9 फीट तक की है और  वजन 160 से 190 kg है और मादा की लंबाई 4.6 फिट से 5.7 तक की है और वजन 110 से 120 kg तक होता है | एशियाटिक लायन के सिर पर बाल थोड़े कम दिखाई देते हैं| जिससे इ...

World elephant day: विश्व हाथी दिवस

World Elephant day World elephant day कब मनाया जाता है | World elephant day 12 अगस्त को मनाया जाता है      पैट्रिसिया सिम्स द्वारा 2011 में विश्व हाथी दिवस स्थापना की गई थी| प्रथम विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त 2012 में मनाया गया था| भारत में पहली बार हाथियों की गिनती 2017 में की गई थी|   हाथी के बारे में छोटी-छोटी बात  एक दशक पहले हाथियों की संख्या 10 लाख से भी ज्यादा थी|100  से भी ज्यादा हर वर्ष हाथियों का शिकार हो रहा है| एक बड़े पुख्तवय का हाथी का वजन 5000 किलो से भी ज्यादा हो सकता है| हाथी रोजाना 150 से 170 किलो तक वनस्पति का सकता है और वे शाकाहारी प्राणी है |हाथी शांत और रमूजी प्राणी है| हाथी का  बच्चा जन्म के 20 मिनट बाद ही वह अपने आप खड़ा हो सकता है|   हाथी के खोराक के बारे में  हाथी शाकाहारी प्राणी है  वे रोजाना 150 से 170 किलो वनस्पति खा सकते हैं| वे सामान्य छोटे-छोटे पौधे, फल,फूलों, जाड की छाल, जाड की  डालिया खाते है  वह दिन में 16 से 18 घंटे तक खाते हैं हाथी दिन में मुख्य तीन बार ही खोराक लेते हैं| हाथी का मनपसंद को ...

RakshaBandhan (Indian festival): रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है? रक्षाबंधन का त्यौहार कब से शुरू हुआ?

  रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है? रक्षाबंधन का त्यौहार कब से शुरू हुआ?   रक्षाबंधन मनाने के दो कारण माना जाता है (1)  बली और वामन देव की कहानी   त्रेता युग में धर्म और अधर्म की लड़ाई चल रही थी| पाताल लोक मे राजा बलि का राज था | बलि एक महान दानवीर राजा था लेकिन वह एक असुर कुल से था | उसकी दान प्रियता और न्याय प्रियता की सब लोग प्रशंसा करते थे| बाली ने बहुत बड़ा यज्ञ करके बहुत सारी शक्तियां हासिल की थी    बालि का यज्ञ    उसमें अहंकार बहुत था| बली ने अपनी शक्ति से स्वर्ग लोक पर आक्रमण कर दिया| और देवराज इंद्र को पराजित कर दिया|  देवता परेशान होकर भगवान विष्णु के पास गए | भगवान विष्णु ने कहा बली अच्छा है लेकिन उसमें अहंकार बहुत है मैं उसे समझा दूंगा|                            देवताओं भगवान विष्णु के पास गए                         भगवान विष्णु वामन का अवतार लेकर राजा बलि के पास गए  बली तब यज्ञ कर रहा था| बली ...

जन्माष्टमी क्यों मनाया जाता है?

  जन्माष्टमी क्यों मनाया जाता है?  भगवान विष्णु ने इस धरती को पापियों से मुक्त करने के लिए इस धरती पर श्री कृष्ण का रूप लिया था | भगवान श्री कृष्ण ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया था |                                 क्रूर और जालिम राजा कंस  मथुरा नगरी के राजा कंस थे वह बड़ा क्रूर और जालिम राजा था | उसके अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे| उसके राज्य में प्रत्येक नागरिक  उनसे तंग आ गए थे |                         आकाश मे कंस की मौत की भविष्यवाणी   एक बार आकाश में भविष्यवाणी हुई  उनकी बहन  देवकी         अठवा पुत्र ही कंस का वध करेगा |                  देवकी और वासुदेव को काल कोठड़ी मे बंध किया यह सुनकर राजा बहुत क्रोधित हुआ और क्रोध में ही उसकी बहन देवकी  और वासुदेव को काल कोठरी में बंद कर दिया | और सैनिकों को वहां...