The Great Wall of China दुनिया की सबसे लंबी दीवार है|
द ग्रेट वाल ऑफ़ चाइना 21196 किलोमीटर फैली है| इस दीवार को बनाने में 5 लाख लोगों की जान चली गई है| इस दीवार को बनाने में 2000 साल लग गए थे | और कहीं साम्राज्य है इसमें कंकाल हो चुके थे| द ग्रेट वाल ऑफ़ चाइना यह नदी तालाब और सूखे रेगिस्तान पहाड़ से गुजरकर समुद्र तक फैली है | और यह दीवार वास्तु कला का बेजोड़ नमूना है| यह दीवार दुनिया की सबसे लंबी दीवार है लेकिन एक कोई सीधी दीवार नहीं है कहीं टुकड़ों में मिलकर बनी है
The Great Wall of China की जरूरत क्यों पड़ी?
तकरीबन 20500 साल पहले चीन के शंघाई प्रांत में रहने वाले लोगों ने खेती-बाड़ी करना शुरू किया था | वह हेलो रिवर के पानी से अपनी खेती की सिंचाई करते थे| उसे दौर में चीन के पास मंगुलिया मंचूरियन सिंह जी ज्ञान जैसे साम्राज्य फैले हुए थे | उसे साम्राज्य मंगुलिया में खास करके उपजाऊ जमीन नहीं थी | वहां हजार किलोमीटर सूखे रेगिस्तान फैले हुए थे | इसलिए वहां के लोग पशुपालन पर निर्भर थे वहीं शंघाई प्रांत में लोग व्यवस्थित तरीके से खेती करते थे| जबकि उंगलियों के कहीं टूटे बिखरे कभी लेते जो हमेशा शंघाई प्रांत में जाकर लुत्फत करते थे | इस समस्या से बचने के लिए चिन्ह अपने एक एक राजा चुना और सीमा पारिभाषिक के और उसके चारों ओर ऊंची ऊंची दीवार बनाने का निर्णय लिया| उसे दौरान किंग वनगची जी पहला शासक बना| 223 BC में उसने चीन की दीवार बनाने का काम शुरू किया|
लेकिन इतनी बड़ी दीवार बनाने के लिए किसी एक साम्राज्य का मुमकिन नहीं था | बल्कि उसके बाद कहीं साम्राज्य ने इस दीवार को बनाने के लिए सहयोग किया और इस दीवार को बनाने के लिए 2000 साल लगा दिए थे | इस दीवार को बनाने के लिए बेस्ट इंजीनियर और वास्तुकला के ज्ञानियों को इस दीवार को बनाने के लिए लाया गया था| इस दीवार को बनाने के लिए 20 लाख मजदूरों ने अपना योगदान दिया है था | इस बड़ी दीवार को बनाने के लिए चीन साम्राज्य ने बड़ी संख्या में आम लोगों की भर्ती की थी साथ में इसमें कैदियों को भी इस्तेमाल किया जाता था| उन्हें सजा के दौर पर 4 साल तक इस दीवार को बनाने के लिए काम करना पड़ता था|
इस दीवार को बनाने के लिए मजदूर का योगदान कैसा था?
द ग्रेट वाल ऑफ़ चाइना को देख तो इसका कहीं सारा हिस्सा रेगिस्तान में खेल है| कहीं सर ऐसा इतनी ऊंचाई पर है जहां पर चढ़ना भी नामुमकिन लगता है और उसके आसपास घने जंगल फैले हैं | उसे दौरान मजदूरों ने इस दीवार को बनाने के लिए काफी कष्ट चढ़ना पड़ता था | कहा जाता है कि 2000 साल तक इस दीवार का काम इतनी तेजी से किया गया था कि मजदूरों को सालों तक अपने घर नहीं जा पाए थे वह दिन के 16 से 18 घंटे तक काम करते थे उसके बाद भी उसको पेट भर खाना नहीं मिलता था| बल्कि उन मजदूरों को ठंड बारिश में इस दीवार के आसपास ही सोना पड़ता था कहीं मजदूरों को बीमारियों से जान भी चली गई कहीं मजदूर भूख से तो कहीं मजदूरो दीवार बनाते वक्त खाई में गिर के मौत हो गई थी| लेकिन दीवार का काम इतनी तेजी से चलायागया था कि उन मजदूरों को वही दीवार के आसपास ही दफन कर दिया जाता था|
इस दीवार को सबसे बड़ा कब्रिस्तान क्यों माना जाता है?
ऐसा कहा जाता है कि इस दीवार को बनाते वक्त 5 लाख लोगों की मौत हो चुकी थी | इसलिए दुनिया का सबसे बड़ा कब्रिस्तान माना जाता है| जो के चीनी लोग उसे शापित मानते हैं | इसका एक दूसरा कारण भी है कि इस दीवार को बनाते हुए कहानी राजा और उनके साम्राज्य कंगाल हो चुके थे |
इस दीवार को कैसे बनाया गया था?
हजारों साल पहले सीमेंट का आविष्कार नहीं हुआ था| इस दीवार को बनाने के लिए ईटों का इस्तेमाल किया गया था| मिट्टी से बनाई गई ईटों को घंटे तक भट्टी में पकाया जाता था इससे इतनी मजबूत हो जाती थी| इन ईटीओ का आकार आज की आईटीओ से थोड़ा बड़ा था| दीवार खड़ी करने से पहले ग्रेनाइट पत्थर को नीचे रख दिया जाता था इसके बाद इस सीटों को इस्तेमाल किया जाता था| दीवार को चिपकाने के लिए चुने और चावल के पानी का इस्तेमाल किया जाता था| इस दीवार को बनाने के लिए 500 मिलियन ईटों का इस्तेमाल किया गया है |
इस दीवार की लंबाई और चौड़ाई |
इस दीवार की लंबाई 23 फीट चौड़ाई 21 फिट है कुछ जगह पर 9 फीट और कुछ जगह पर 35 फिट है| इस दिवाल के बनाने का मुख्य लक्ष्य राज्य की सुरक्षा था| इस दीवार की चौड़ाई इसीलिए ज्यादा रखी गई थी कि इस दीवार पर सैनिक और घुड़सवार आसानी से चल सके |
इस दीवार पर हर 100 मीटर पर वॉच टावर क्यों बनाया गया था?
इस दीवार पर दर एक सौ मीटर की दूरी पर एक वॉच टावर बनाया गया है| जिसके पर एक सैनिक तैनात रहता था | स्वराज के उसे तरफ की हलचल को मॉनिटर करता था| अगर दिन के समय में दुश्मन का खतरा महसूस होता तो झंडा लहराता था और रात के समय में आग जलाकर बाकी सैनिकों को उसकी खबर कर देता था| उसे टावर में के नीचे कमरे थे जिसमें 25 सैनिक रह सकते थे | इस दीवार में ऐसे 25000 टावर मौजूद है जिसमें 6 लाख सैनिक रहते थे| इस टावर में कहीं सारी सुरंग भी है |
इस दीवार को व्यर्थ प्रोजेक्ट क्यों माना जाता है?
इतनी मजबूत और इतनी बड़ी दीवार होने के बावजूद भी इसे एक व्यर्थ प्रोजेक्ट माना जाता है क्योंकि इतनी बड़ी दीवार बनाने के बाद बावजूद भी मंगोल और विदेशी आक्रमणकारी चीन पर आक्रमण करने में सफल रहे थे| 1550 में फिर से मंगोल ने इस दीवार को पार कर दिया था जिसके बाद 1644 में मैं मछु चाम्राज्य के सैनिक दीवार को रैंकड चीन में घुसे थे |
>>आज भी हर साल एक करोड़ से भी ज्यादा पर्यटक इस दीवार को देखने के लिए आते हैं |
>>The Great Wall of China सात अजूबे में से एक है




Super 👍
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