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Alexander the Great ( सिकंदर की कहानी )

Alexander ( सिकंदर )


सिकंदर का जन्म

 सिकंदर का जन्म 356 BCE मेसिडोनिया के पोला शहर में हुआ था| जन्म होते ही शहर के सभी लोग उसको ग्रीक भगवान Zues उसका बच्चा कहने लगे| उसमें उसके मां ने भी साथ दिया | 

 सिकंदर की पढ़ा 

   दुनिया के सभी माता-पिता की तरह उसके पिता भी philip 2 भी उसको एक काबिल राजा बनाने चाहते थे| इसीलिए फिलिप्स ने ग्रीस के बेस्ट स्कॉलर से बेस्ट ट्रेंनिंग दिलाई| और शहर के सबसे मशहूर फिलोसोफर एरिस्टोटल का भी नाम शामिल है जिन्होंने सिर्फ 3 साल की ट्रेनिंग में सिकंदर के अंदर खुले विचार, सब्र और कूटनीति की ऐसी समझ पैदा कर दी की उसे राजनीति गुणो को और ज्यादा तेज कर दिया|

 सिकंदर की पहली लड़ाई


 उसकी पहली झलक जब दुनिया को देखने मिली सिकंदर 10 साल के थे तब उसने मशहूर उत्तेजित घोड़े (bucephalus) बुसेफालुस को बड़ी आसानी से ट्रेन कर लिया | उसके बाद 18 साल की उम्र में सिकंदर ने अपने पिता के साथ battle of chaeronea मे हिस्सा लिया| यह पहला युद्ध था जिसमें सिकंदर ने अपनी महानता का प्रदर्शन किया | उसके बाद लोगों में उसके प्रति विश्वास बढ़ गया| 

 पर्शियन साम्राज्य का विनाश

उसके बाद सिकंदर में अहंकार बढ़ने लगा और पर्शियन साम्राज्य प्रति नफरत भी बढ़ ने लगी | वहीं पर्शियन अंपायर जिसे दुनिया के नक्शे से मिटाने का  सपना ग्रिस का हर बच्चा और उसके पिता ने देखा था|उसे हासिल करने के लिए सिकंदर ग्रिस के बाकि शहरो पर अपना रुतबा हासिल करने लगा|ग्रिस की आर्मी, लोग और कमांडर्स को अपनी तरफ कर लिया ताकि जरूरत पड़ने पर काम आए | पूरे ग्रीस को एक करने के बाद सिकंदर पर्शियन के दक्षिणी हिस्से की तरफ बढ़ने लगा| और उसका सामना होता है पर्शियन की आर्मी से एक ऐसी आर्मी जो सिकंदर की सेना से दुगनी थी| फिर भी सिकंदर ने उसे मार गिराया | इस युद्ध में सिकंदर को पर्शियन साम्राज्य की एक छोटी सी झलक देखने को मिली| आगे चलते सिकंदर ने कूटनीति और  अपने बल पर पूरे दक्षिणी पश्चिमी साम्राज्य को मेसिडोनिया में शामिल कर दिया| दक्षिणी पर्शियन साम्राज्य को जीतने के बाद भी सिकंदर को चेन नहीं मिला क्योंकि सिकंदर का पहले से ही मकसद था पर्शियन आर्मी का विनाश | सिकंदर अपनी सेवा के साथ पर्शियन का पर्शियन का अहम हिस्सा उस तरफ बढ़ने लगा | और वहां उनका सामना सबसे बड़ी पर्शियन आर्मी से हुआ| पर्शियन आर्मी सिकंदर की सेना से बड़ी थी |


 सिकंदर के पास 47000 सेना वही पर्शियन के पास एक लाख से भी ज्यादा सेना थी| लेकिन पर्शिया के राजा  DARIUS 3 सिकंदर की चाल को जानते थे |DARIUS के पास ज्यादा आर्मी थी उसके बाद भी उसने आर्मी से कहा सतर्क रहने को| उसके बाद भी सिकंदर ने उसकी चालबाजी और अपने बलबूते पर इस युद्ध को जीता | सिकंदर ने इस युद्ध को  जीतने के बाद अपनी काया ही पलट दी थी क्योंकि इस युद्ध को जीतने के बाद दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य खत्म हो चुका था|

 इस युद्ध को जीतने के बाद सिकंदर 25 साल की उम्र में एशिया का सबसे बड़ा मास्टर बन गया था|

 सिकंदर का भारत की ओर कदम 

  हम जानते हैं की जीत का नशा किसी भी इंसान को रुकने नहीं देता इसी नशे की हालत में सिकंदर ने भारत की ओर कदम बढ़ाये | और भारत की ओर बढ़ते हुए उसका सामना हुआ पूर्व राज्य के साथ जिसका राजा था पोरस  | जो चाहते थे कि किसी भी हालत में सिकंदर को भारत में नहीं आने देना चाहते थे | और इसी बीच दोनों के बीच जंग छिड़ गई और इस जंग सबसे ज्यादा चलने वाली जंग थी और इसके सामने बाकी सभी राजाओं ने अपने घुटने टेक दिए थे लेकिन पोरस महीनो के बाद भी उसके सामने घुटने टेकने को हाजिर नहीं था | हालांकि इतनी मशक्कत के बाद भी यह युद्ध पोरस नहीं जीत पाया लेकिन उसके युद्ध कला से सिकंदर  काफी प्रभावित हुआ |

 इस युद्ध से प्रभावित होकर सिकंदर ने पोरस को अपना राज्य वापस दिया|

 सिकंदर की मृत्यु

 दुनिया में कोई राजा इसको हरा नहीं पाया | सिकंदर की मौत 32 वर्ष की कम उम्र मे हो गय | सिकंदर की मौत कम उम्र में हो गई वरना वह पूरी दुनिया पर राज करता | 

आज दुनिया में कम से कम 50 से भी ज्यादा सिटी सिकंदर के नाम पे है| उनमे से कहीं सिटी की स्थापना खुद सिकंदर ने की थी| और उन्होंने जाते-जाते अपनी मिलिट्री की स्ट्रेटजी लोगों को दी जिसे आज भी कहीं मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर पर  ट्रेनिंग दी जाती  है |




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