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RakshaBandhan (Indian festival): रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है? रक्षाबंधन का त्यौहार कब से शुरू हुआ?

 रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है? रक्षाबंधन का त्यौहार कब से शुरू हुआ?

 रक्षाबंधन मनाने के दो कारण माना जाता है

(1)  बली और वामन देव की कहानी 

 त्रेता युग में धर्म और अधर्म की लड़ाई चल रही थी| पाताल लोक मे राजा बलि का राज था | बलि एक महान दानवीर राजा था लेकिन वह एक असुर कुल से था | उसकी दान प्रियता और न्याय प्रियता की सब लोग प्रशंसा करते थे| बाली ने बहुत बड़ा यज्ञ करके बहुत सारी शक्तियां हासिल की थी

   बालि का यज्ञ 

  उसमें अहंकार बहुत था| बली ने अपनी शक्ति से स्वर्ग लोक पर आक्रमण कर दिया| और देवराज इंद्र को पराजित कर दिया| 

देवता परेशान होकर भगवान विष्णु के पास गए | भगवान विष्णु ने कहा बली अच्छा है लेकिन उसमें अहंकार बहुत है मैं उसे समझा दूंगा|

                           देवताओं भगवान विष्णु के पास गए

                       भगवान विष्णु वामन का अवतार लेकर राजा बलि के पास गए  बली तब यज्ञ कर रहा था| बली ने एक छोटे बालक ब्राह्मण को देखकर खुश हो गया| हे ब्राह्मण देव आप क्या चाहते हो आप जो चाहे वह मांग लो| 

वामन ने मुस्कुराते हुए कहा केवल तीन डगला भूमि चाहिए| बलि हंसते हुए बोला बस इतना ही पूरा राज्य मांग लो| लेकिन वामन ने कहा मुझे तीन डगला भूमि ही चाहिए| जैसे ही बली ने दान देने का संकल्प किया वामन ने अपना विराट स्वरूप प्रगट किया|

 भगवान विष्णु का वामन स्वरूप 

वामन भगवान ने एक पगले मे पूरी पृथ्वी नाप ली |

दूसरे पगले में पूरा आकाश नाप लिया|

भगवान ने पूछा राजन तीसरा पर कहां पर रखूं |

                         भगवान विष्णु ने बली सर पर पेर रखा 

                   तभी बली को समझ आ गया कि यह कोई साधारण ब्राह्मण नहीं है| बली ने विनम्रता से कहा प्रभु तीसरा पेर मेरे सर पर रख दीजिए|

                               बली को पाताल भेज दिया 

भगवान विष्णु ने बली के सर पर पेर रखा और उसे पताल लोग भेज दिया | 

लेकिन बली की दानवीरता और भक्ति देखकर भगवान ने कहा तुम्हारी भक्ति से में प्रसन्न हूं मांग लो जो चाहिए वह |

 बली ने कहा यदि आप प्रसन्न है तो आप मेरे साथ पाताल लोक  चले | भगवान बली के साथ पाताल लोक चलते हैं|

 लेकिन इसे उसकी पत्नी लक्ष्मी जी बहुत नाराज थी क्योंकि भगवान पाताल लोक चले गए थे और वैकूट सुना हो गया था| 

लक्ष्मी जी कहती है कि उसे कैसे वापस लाया जाए तभी लक्ष्मी जी ने सोचा और श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी जी ब्राह्मणी का रूप लेकर पाताल लोक पहुंच गई |

 वहां जाकर बली से कहती है कि मैं आपको राखी बांधना चाहती हूं मैं आपको अपना भाई जैसे मानती हूं |

 लक्ष्मी जी बली को राखी बांधती है 

 जब लक्ष्मी जी ने प्रेम से राखी बांधी तब बली ने कहा माता आपने मुझे अपना भाई बनाया है बताइए क्या चाहिए आपको तब माता लक्ष्मी ने अपना असली रूप प्रकट किया | बली से कहा आपने मेरे पति को अपने साथ पाताल लोक में रख लिया है आप मेरे भाई है आप मेरे पति को वापस दे दीजिए| 

बली कहते हैं माता आपने मुझे अपना भाई माना है और भाई का पहला कर्तव्य है बहन की रक्षा करना| आपके पति आपके हैं | 

इस प्रकार लक्ष्मी जी ने राखी के बंधन से अपने पति को वापस पाया था|

(2) भगवान कृष्ण और द्रौपदी

द्वापर युग में महाभारत काल द्रोपदी की कहानी

        हस्तिनापुर की राज्यसभा में शिशुपाल का वध हो चुका था|भगवान श्री कृष्ण के हाथ से सुदर्शन चक्र जब शिशुपाल का वध करके चक्र वापस आया तब भगवान श्री कृष्ण के अंगुली पर गेहरा घाव पड़ गया था| 

वो तुरंत दौड़ के श्री कृष्ण के पास गई | उनकी उंगली से खून की धारा बह रही थी|

 द्रोपदी  कुछ सोचे समझे अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ा और श्री कृष्ण की उंगली पर बांध दिया|

 वह कपड़ा द्रोपदी के प्रेम और चिंता से भरा हुआ था | श्री कृष्ण द्रौपदी से कहते हैं तुमने जो आज किया है वह मैं कभी नहीं भूलूंगा | 

ए केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं है यह एक बहन का प्रेम का  है| श्री कृष्ण कहते हैं तुम जब भी संकट में हो मैं तुम्हारी रक्षा करूंगा |

 समय बिता जब  दुर्योधन की सभा में द्रोपदी का शीर हरण हो रहा था तब द्रौपदी ने पूरी सभा में श्री कृष्ण को पुकारा| 


हे कृष्ण आपने मुझे वचन दिया था कि मैं तुम्हारी रक्षा करने के लिए जरूर आऊंगा | 

द्रौपदी श्री कृष्णा से कहती है मैं आपकी शरण में हूं तब हुआ वह चमत्कार पूरी सभा देखकर दंग रह गई |

 द्रोपदी की साड़ी बढ़ती ही चली गई| दुशासन साड़ी खींचते खींचते थक गया लेकिन साड़ी खत्म ही नहीं हुई| 

श्री कृष्ण ने अपना वचन निभाया और यह राखी  का सिर्फ धागा ही नहीं बल्कि एक पवित्र वचन है| एक अटूट बंधन है जब युद्ध के बाद कृष्ण द्रौपदी से मिले द्रौपदी जो धागा तुमने मेरी अंगुली पर बांधा था|आज तुम्हारा सम्मान की रक्षा बन कर आया | 

राखी का यह बंधन सिर्फ भाई बहन का बंधन ही नहीं एक दूसरे की रक्षा करना भी है|

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