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जन्माष्टमी क्यों मनाया जाता है?

 जन्माष्टमी क्यों मनाया जाता है?

  •  भगवान विष्णु ने इस धरती को पापियों से मुक्त करने के लिए इस धरती पर श्री कृष्ण का रूप लिया था |

  • भगवान श्री कृष्ण ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया था |

                               क्रूर और जालिम राजा कंस

  •  मथुरा नगरी के राजा कंस थे वह बड़ा क्रूर और जालिम राजा था | उसके अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे| उसके राज्य में प्रत्येक नागरिक  उनसे तंग आ गए थे |

                       आकाश मे कंस की मौत की भविष्यवाणी

  •   एक बार आकाश में भविष्यवाणी हुई  उनकी बहन  देवकी         अठवा पुत्र ही कंस का वध करेगा | 

               देवकी और वासुदेव को काल कोठड़ी मे बंध किया

  • यह सुनकर राजा बहुत क्रोधित हुआ और क्रोध में ही उसकी बहन देवकी  और वासुदेव को काल कोठरी में बंद कर दिया | और सैनिकों को वहां पहेरा रखने के लिए रख दिया और कहा जब भी देवकी जी किसी बच्चे को जन्म दे मुझे जरुर कहना |

        देवकी के सात बच्चों को मार दिया
  • उसके बाद कंस ने देवकी के एक-एक करके सात बच्चों को मार डाला |


  •  जब देवकी जी ने आठवीं पुत्र को जन्म दिया तब भगवान विष्णु ने वासुदेव को आदेश दिया कि श्री कृष्ण को गोकुल में भेजा जाए जसोदा और नंद बाबा के घर ताकि उसके मामा कंस उसे मार ना सके | 

        वासुदेव कृष्ण को जेल से नन्द बाबा के घर लेकर गए
  • उसके बाद वासुदेव ने श्री कृष्ण को नंद बाबा के घर पहुंचाया |
  • नंद बाबा के घर जन्म हुआ बच्चे को लेकर वह वापस काल कोठरी  में आ गया|
  • वासुदेव को जाने और आने तक काल कोठरी के सभी सैनिक विष्णु के प्रभाव से मूर्छित पड़े हुए थे | 
  • जब मामा कंच को देवकी के आठवे  पुत्र के बारे में पता चला तब उसने जेल में आकर देवकी के आठवे पुत्रों को मार डाला तथा आकाश की ओर देखकर चिल्लाने लगा और कहा कि मैंने आकाशवाणी को बदल दिया | 
  • मेरी मौत को मैंने अपने स्वयं हाथों से मौत दे दी | 
  • लेकिन मामा कंस को एक ख्याल नहीं था कि उसकी मौत सुरक्षित गोकुल में पहुंच गई है|

    श्री कृष्ण का लालन पालन माता यशोदा नंद बाबा के घर शुरू हो गया | 

                           श्री कृष्ण ने किया मामा कंस का वध

  • श्री कृष्ण ने बड़े होकर कंस का वध करके मथुरा नगरी को आजाद कर दिया|
  •  श्री कृष्ण का जन्म होने के बाद ही जन्माष्टमी को मनाया जाने लगा|

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