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World lion day (10,August ): विश्व सिंह दिवस

 World lion day 

 World lion day मनाने की शुरुआत कब हुई थी?

World lion day मनाने की शुरुआत 10 अगस्त 2013 से हुई है

 शेर से जुड़ी हुई कुछ बातें |

  • आमदौर पे शेर की आयुष 16 से 18 साल तक की होती है |नर रोजाना 8 किलो मांस खाता है और मादा 5 किलो खाती है |
  • शेर जब एक बार व्यवस्थित भोजन करके 15 कलाक तक आराम करता है| शेर प्रति कलाक 50 किलोमीटर तक दोड़ता है जरूरत पड़ने पर प्रति कलाक 80 किलोमीटर भी दौड़ सकता है| परंतु ज्यादा वजन के कारण प्रतिकलक 80 किलोमीटर कभी-कभी दौड़ लगाते हैं|
  • शेर हिंसा प्राणियों में सबसे आलसु प्राणी है और सबसे ज्यादा आराम करता है| शेर हमेशा रात्रि के समय पर ही शिकार करता है |

 दुनिया में आज शेर की दो ही जाती जिंदा है |

(1) एशियाटिक लायन  

  •  पूरी दुनिया में एशियाटिक लायन सिर्फ भारत के गुजरात में साषण गिर में स्थित है | 
  • एशियाटिक लायन नर की लंबाई 6.5 फिट से 9 फीट तक की है और  वजन 160 से 190 kg है और मादा की लंबाई 4.6 फिट से 5.7 तक की है और वजन 110 से 120 kg तक होता है |
  • एशियाटिक लायन के सिर पर बाल थोड़े कम दिखाई देते हैं| जिससे इसके कान साफ दिखाई देते हैं| और इसकी पूछ का गुच्छा अफ्रीकन लायन से ज्यादा मोटा और गुच्छेदार है |
  • साल 2015 में यहां शेरों की कुल संख्या 523 थी लेकिन 2020 में इनकी आबादी में लगभग 29% की वृद्धि हुई और उनकी कुल संख्या 674  हो गई 

 (2) अफ्रीकन लायन

  • अफ्रीकन लायन के सिर पर बाल होते हैं एकदम घने बाल होने पर उसका शीर पूरा ढका रहता है |
  • अफ्रीकी शेर एसियन शेर ज्यादा बड़े होते हैं | अफ्रीकी शेर के झुंड एशियाई शेर के झुंड से ज्यादा बड़ा होता है|
  • अफ्रीकी शेर बड़े जानवरों का शिकार ज्यादा करते हैं जबकि एशियाई शेर छोटे जानवर का शिकार करना ज्यादा पसंद करते हैं |

पहली बार शेरों पर शिकार करने की रोक किसने लगाई थी?

  •  जूनागढ़ के नवाब  महाबत खान ने शेर की आबादी घटती हुए देखकर 1889 मे अपनी जमीनों में शेरों पर शिकार करने पर रोक लगा दी थी|
  • शेरों की आबादी बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने एशियाटिक लायन को wild life protection act 1972 मे लागू किया 

विश्व सिंह दिवस क्यों मनाया जाता है

  • हर साल 10 अगस्त को विश्व सिंह दिवस मनाया जाता है इसका मुख्य उद्देश्य शेरों का संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उसके शिकार को रोकना है| इस दिन उनके संरक्षण के लिए समर्थन जताने का प्रयास भी किया जाता है | शेरों की दुर्दशा और उनके विषय में विश्व स्तर पर बात की जा सके| जंगली शेर के आसपास रहने वाले लोगों को उनके विषय में शिक्षित किया जा सके| विलुप्त हो रही प्रजातियों को सुरक्षित और संरक्षित किया जा सके
  • ऐसीयाय शेर को वैज्ञानिक ने रूप से पैंथेरा लीयों पर्षिका कहा जाता है| ऐसीयाय शेर IUCN मुताबित रेड लिस्ट में है यानी की लुप्त प्रजातियों में से है|
  • आज एक केवल अफ्रीका के जंगल में और भारत में भी पाए जाते हैं| भारत में केवल गुजरात का गिर फॉरेस्ट एकमात्र ऐसा स्थान है जहां ऐसीयाय शेयर पाए जाते हैं |

 शेरों का रहना क्यों जरूरी है

  •  इकोसिस्टम में संतुलित बनाए रखने के लिए शेरों का होना बहुत महत्वपूर्ण है| लगभग 2000 साल पहले पृथ्वी पर 10 लाख से ज्यादा शेयर पाए जाते थे | लेकिन जंगलों की कटाई तस्करी और अवैध शिकार के चलते शेरों की आबादी धीरे-धीरे कम होती जा रही है| बीते 100 सालों में शेर अपनी ऐतिहासिक सीमा के 80% इलाके से गायब हो गए हैं|

  गुजरात मे शेरों की आबादी 

  •  गुजरात में शेरों की संख्या धीरे -धीरे बढ़ती जा रही है| हर 5 साल में शेरों की वस्ती गिनती की जाती है और एक गिनती वन विभाग द्वारा की जाती है|

  क्रम.       साल         संख्या

    1.       1990        284

    2.       1995        304

    3.       2001        327

    4.       2005         359

    5.       2010         411

    6.       2015         523

    7.       2020         674

 नोंधगुजरात मे 16 मि शेरो की गिनती के मुताबित 2025 में शेरों की  संख्या 891 के करीब है| 

           

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