पृथ्वी या किसी अन्य ग्रहों की सतह पर मौजूद वह प्राकृतिक दरार या छिद्र होता है जिसके माध्यम से पृथ्वी के भीतर का गरम मैग्मा और भाप अचानक विस्फोट से बाहर निकलती है जिसे हम ज्वालामुखी कहते हैं
ज्वालामुखी का निर्माण कैसे होता है।
जब तापमान 1000 सेल्सियस से 3000 सेल्सियस डिग्री होता है। इस वजह से पृथ्वी के अंदर की चट्टाने पिघल जाती है। और तरल पदार्थ बनती है। एपिगला हुआ तरल पदार्थ मेग्मा कहलाता है। जो चट्टानों की अपेक्षा से हलका होता है। यह हल्का होने की वजह से पृथ्वी की ऊपर सतह तक आ जाता है। और बाहर निकलने लगता है। उसे तरह ज्वालामुखी का जन्म होता है।
मैग्मा बनता कैसे हैं?
पृथ्वी के अंदर का जो भाग है वह एक श्रृंखला में बना है। जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट कहा जाता है। जब टैकटोनिक प्लेट्स एक दूसरे से दूर जाती है। या फिर एक दूसरे के नीचे स्लाइड करती है। तब पृथ्वी के अंदर वो पिघलने की प्रक्रिया शुरू होती है। तब मैग्मा बनता है।
पृथ्वी की गहराई में मौजूद अधिकतक गर्मी और टेक्टोनिक प्लेटों की हिलसाल से जो गर्मी बाहर आती है उसे हम ज्वालामुखी कहते हैं।
ज्वालामुखी के मुख्य प्रकर
ज्वालामुखी मुख्य रूप से तीन प्रकार के हैं |
(1) सक्रिय ज्वालामुखी
जो हाल ही में फटे हो या जीन में लगातार विस्फोट होता रहता है उसे सक्रिय ज्वालामुखी कहते हैं।
(2) सुषुप्त ज्वालामुखी
जो वर्तमान में शांत है लेकिन भविष्य में कभी भी फट सकते हैं उसे सुषुप्त ज्वालामुखी कहते हैं
(3) मृत ज्वालामुखी
जो हजारों सालों से नहीं फटे हुए और जिनमे भविष्य में भी फटने की कोई संभावना नहीं है उसे मृत ज्वालामुखी कहते हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा ज्वालामुखी
दुनिया का सबसे बड़ा ज्वालामुखी मोनालुआ जो अमेरिका में है । मोनालुआ प्रशांत महासागर में है और उनके साथ ही यह दुनिया का सबसे बड़ा सक्रिय ज्वालामुखी है।
" दुनिया का सबसे ऊंचा सक्रिय ज्वालामुखी कोटोपैक्सी है "
कोटोपैक्सी ज्वालामुखी इकवाडीर मे स्थित है। यह वर्तमान में सक्रिय ज्वालामुखी है इसकी ऊंचाई 5897 मीटर है।
'सबसे ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी इंडोनेशिया में (55)है'
दुनिया में कितने ज्वालामुखी है?
वैज्ञानिकों का यह मानना है कि दुनिया में 1350 के आसपास संभावित सक्रिय ज्वालामुखी है।


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें